- सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए
- डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचा
- कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव से बाजार दबाव में
मुंबई: घरेलू शेयर बाजार शुक्रवार को दबाव में बंद हुए, क्योंकि कमजोर रुपये, बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया, जिसका असर सीधे बाजार की धारणा पर दिखाई दिया।
बीएसई सेंसेक्स 160 अंकों से ज्यादा टूटकर 75,237 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 भी गिरकर 23,643 के स्तर पर आ गया। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब निवेशक पहले से ही महंगाई और वैश्विक बॉन्ड यील्ड बढ़ने को लेकर सतर्क बने हुए हैं।
शेयर बाजार गिरावट के पीछे क्या हैं बड़े कारण
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू की है। कमजोर रुपया और महंगे ईंधन ने मुद्रास्फीति को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरी। ब्रेंट क्रूड 109 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके अलावा, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने विदेशी निवेशकों को भी सतर्क कर दिया है। ऊंची यील्ड अक्सर इक्विटी बाजार से पैसा बाहर निकालती है, जिसका असर उभरते बाजारों पर ज्यादा पड़ता है।
किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा दबाव दिखा
मेटल, रियल्टी और PSU बैंक शेयर टूटे
एनएसई पर सबसे ज्यादा दबाव मेटल और रियल्टी शेयरों में देखने को मिला। निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 2 प्रतिशत टूटा, जबकि रियल्टी इंडेक्स में भी भारी गिरावट दर्ज हुई।
पीएसयू बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर भी दबाव में रहे। निवेशकों को डर है कि बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों का असर इन सेक्टर्स की ग्रोथ पर पड़ सकता है।
आईटी और मीडिया सेक्टर ने संभाला मोर्चा
हालांकि, आईटी और मीडिया सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली। आईटी शेयरों को कमजोर रुपये का फायदा मिला क्योंकि बड़ी आईटी कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा डॉलर में आता है।
निफ्टी आईटी इंडेक्स में 1 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज हुई, जबकि मीडिया और हेल्थकेयर शेयर भी हरे निशान में बंद हुए।
वैश्विक बाजारों में भी दबाव क्यों बढ़ा
एशियाई बाजारों में भी बिकवाली का माहौल दिखा। जापान, हांगकांग, दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाजार गिरावट के साथ बंद हुए।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अगर यह संकट लंबा खिंचता है, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
बाजार अब संभावित सरकारी और केंद्रीय बैंक उपायों पर नजर लगाए हुए है, खासकर ऐसे कदमों पर जो रुपये को स्थिर करने और विदेशी निवेशकों का भरोसा बनाए रखने में मदद कर सकें।


















