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LPG जहाज भारत पहुंचे, सप्लाई पर बड़ा असर

LPG जहाज भारत की ओर, सप्लाई राहत के संकेत। जानें कैसे वैश्विक तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित होगी।
LPG जहाज भारत पहुंचे
LPG जहाज भारत पहुंचे
मुख्य निष्कर्ष:
  • दो बड़े LPG जहाज सुरक्षित होकर भारत की ओर बढ़े
  • वैश्विक तनाव के बीच ऊर्जा सप्लाई पर राहत के संकेत
  • भारत की विदेशी जहाजों पर निर्भरता चिंता का कारण

नई दिल्ली: भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। LPG जहाज भारत की ओर सुरक्षित बढ़ रहे हैं, जिससे गैस सप्लाई पर मंडरा रहा खतरा कुछ हद तक कम होता दिख रहा है। पाइन गैस और जग वसंत नाम के दो बड़े जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। यह वही रास्ता है जो वैश्विक तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है।

अगर ये जहाज समय पर पहुंचते हैं, तो घरेलू LPG उपलब्धता पर तत्काल दबाव कम हो सकता है। लेकिन इसके पीछे छिपे जोखिम अभी खत्म नहीं हुए हैं।

LPG जहाज भारत: सप्लाई पर कितना असर पड़ेगा

सरकारी जानकारी के मुताबिक, पाइन गैस जहाज 27 मार्च को न्यू मैंगलोर पोर्ट पहुंचेगा, जिसमें 45,000 मीट्रिक टन LPG है। वहीं, जग वसंत 26 मार्च को कांडला पोर्ट पहुंचेगा और इसमें 47,600 मीट्रिक टन गैस लोड है।

यह मात्रा घरेलू खपत के लिहाज से महत्वपूर्ण है, खासकर ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन बाधित हो रही है।

हालांकि, 20 भारतीय जहाज अभी भी होर्मुज के पश्चिम में फंसे हुए हैं। इसका मतलब है कि सप्लाई पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य संकट: क्यों बढ़ा खतरा

फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ा है। इसका सीधा असर इस समुद्री मार्ग पर पड़ा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव सप्लाई को प्रभावित करता है।

जहाजों को पहले यहां रुकना पड़ा, जिससे डिलीवरी में देरी हुई। अब अनुमति मिलने के बाद वे आगे बढ़ सके हैं, लेकिन जोखिम अभी भी बना हुआ है।

भारत की ऊर्जा रणनीति और आत्मनिर्भरता पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि सरकार वैश्विक तेल संकट से देश को बचाने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है।

उन्होंने संसद में स्पष्ट किया कि भारत का लगभग 90 प्रतिशत व्यापार विदेशी जहाजों पर निर्भर है। यह स्थिति किसी भी वैश्विक संकट में देश के लिए खतरा बन सकती है।

क्या बदलेगी भारत की नीति?

सरकार अब ‘मेक इन इंडिया’ के तहत करीब 70,000 करोड़ रुपए के निवेश से भारतीय जहाज निर्माण को बढ़ावा दे रही है।

इसका मकसद साफ है

  • विदेशी निर्भरता कम करना
  • सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना
  • भविष्य के संकटों से बचाव करना

आने वाले समय में भारत अपनी ऊर्जा लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने पर ज्यादा ध्यान देगा।

इस पूरे घटनाक्रम से एक बात साफ है। फिलहाल LPG सप्लाई पर राहत जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक हालात को देखते हुए खतरा पूरी तरह टला नहीं है।

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