सुप्रीम कोर्ट की शर्तों पर CJP का ऐतराज, सभी केस वापस लेने की मांग
- CJP ने सुप्रीम कोर्ट की राहत संबंधी शर्तों को स्वीकार करने से इनकार किया है।
- संगठन सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR बिना किसी शर्त के वापस लेने की मांग कर रहा है।
- अब सरकार के आदेश और सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर पूरे मामले की दिशा निर्भर करेगी।
नई दिल्ली: देश में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देशों पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने खुलकर असहमति जताई है। संगठन का कहना है कि अदालत द्वारा राहत के लिए तय की गई शर्तें उन्हें स्वीकार नहीं हैं और सरकार को सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR बिना किसी शर्त के वापस लेनी चाहिए।
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान निर्देश दिया कि 18 वर्ष से कम आयु के ऐसे प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। अदालत ने पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम राहत दी। हालांकि CJP का कहना है कि यह राहत सीमित है और उनकी मूल मांगों को पूरा नहीं करती।
CJP ने सुप्रीम कोर्ट की शर्तों को क्यों ठुकराया?
CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि संगठन की मांग शुरू से स्पष्ट रही है।
उनके अनुसार,
- सभी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस ली जाए।
- हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार सभी लोगों को बिना शर्त रिहा किया जाए।
- भविष्य में भी किसी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कार्रवाई न हो।
- राहत किसी आयु, आपराधिक रिकॉर्ड या अन्य शर्तों से न जोड़ी जाए।
दास ने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट अतिरिक्त राहत देना चाहता है तो उसका स्वागत है, लेकिन वह उनकी मूल मांगों के अतिरिक्त होनी चाहिए, न कि उसके स्थान पर।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या अंतरिम निर्देश दिए?
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि:
- 18 वर्ष से कम उम्र के प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए।
- यह राहत केवल उन लोगों पर लागू होगी जिनका पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
- अदालत ने पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों पर कई अंतरिम निर्देश भी जारी किए हैं।
अदालत की शर्तों पर CJP की आपत्ति
सौरभ दास का कहना है कि यदि राहत को “पहले से FIR न होना” या “शांतिपूर्ण प्रदर्शन” जैसी शर्तों से जोड़ा गया तो इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है।
उनका आरोप है कि पुलिस किसी भी प्रदर्शनकारी को “अशांतिपूर्ण” बताकर राहत से वंचित कर सकती है। इसलिए संगठन चाहता है कि सभी संबंधित लोगों को समान रूप से राहत मिले।
सरकार से क्या वादा होने का दावा?
सौरभ दास ने दावा किया कि सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत में उन्हें भरोसा दिया गया था कि आदेश मंगलवार तक जारी कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान संगठन ने विशेष रूप से यह आग्रह किया था कि आदेश में ऐसी कोई शर्त शामिल न हो जिससे भविष्य में पुलिस को कार्रवाई का आधार मिल सके।
CJP की प्रमुख मांगें
संगठन ने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा है कि:
- सभी FIR बिना शर्त वापस ली जाएं।
- सभी गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए लोगों को तुरंत रिहा किया जाए।
- भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कार्रवाई न हो।
- राहत किसी आयु, आपराधिक इतिहास या अन्य शर्तों से न जोड़ी जाए।
आगे क्या हो सकता है?
अब निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यदि सरकार अदालत के निर्देशों के अनुरूप आदेश जारी करती है तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उसमें CJP की मांगों को किस हद तक शामिल किया जाता है। दूसरी ओर, संगठन ने संकेत दिया है कि वह अपनी मूल मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं है।
