- ईरान का सीधा हमला: ईरानी सेना (IRGC) ने रविवार तड़के कुवैत के अली अल sलेम एयर बेस और बहरीन में स्थित अमेरिकी पांचवें बेड़े के मुख्यालय सहित कुल 8 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से नष्ट करने का दावा किया है।
- अमेरिका की जवाबी कार्रवाई: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर CENTCOM ने ईरान के 5 तटीय सैन्य ठिकानों और रडार साइटों पर एयरस्ट्राइक की, जो पनामा और सिंगापुर के तेल टैंकरों पर हुए ईरानी हमलों का जवाब थी।
- खाड़ी देशों में रेड अलर्ट: ईरान के इस जवाबी हमले के बाद कुवैत की वायु रक्षा प्रणालियाँ (Air Defense) सक्रिय कर दी गई हैं और बहरीन में आपातकालीन सायरन बजाकर नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी गई है।
तेहरान/वाशिंगटन: पश्चिम एशिया (Mid-East) में तनाव चरम पर पहुँच गया है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा छद्म युद्ध अब सीधे सैन्य टकराव में बदल चुका है। ईरान के सरकारी मीडिया, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने रविवार (28 जून 2026) को तड़के एक संयुक्त मिसाइल और ड्रोन अभियान चलाकर कुवैत और बहरीन में स्थित आठ अमेरिकी सैन्य ढांचों को नष्ट करने का दावा किया है।
ईरान ने इन विनाशकारी हमलों को अपने तटीय ठिकानों पर हुए अमेरिकी सैन्य हमलों की दूसरी लहर के खिलाफ एक “निर्णायक प्रतिशोध” बताया है।
सुबह 2:00 से 3:00 बजे के बीच बरसीं बैलिस्टिक मिसाइलें
आईआरजीसी (IRGC) के जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी बयान के मुताबिक, उनकी नौसेना और अंतरिक्ष बलों ने स्थानीय समयानुसार रविवार सुबह 2:00 बजे से 3:00 बजे के बीच यह ऑपरेशन चलाया।
ईरानी सेना ने अपने बयान में कहा:
“आईआरजीसी की नौसेना और वायु सेना में आपके उत्साही बेटों ने आज, रविवार को सुबह 2 से 3 बजे के बीच एक संयुक्त मिसाइल और ड्रोन अभियान के दौरान, कुवैत के अली अल-सलेम अड्डे और बहरीन के पोर्ट सलमान में पांचवें नौसेना बेड़े में बच्चों की हत्या करने वाली अमेरिकी सेना के आठ महत्वपूर्ण ढांचों को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से दागकर नष्ट कर दिया।”
ईरान ने वाशिंगटन पर पश्चिम एशिया में शत्रुता समाप्त करने के लिए दोनों पक्षों के बीच हुए 14 सूत्री समझौता ज्ञापन (MOU) के तहत युद्धविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है। ईरान का दावा है कि अमेरिका ने रविवार को उसके पांच तटीय ठिकानों पर हमला किया था। साथ ही ईरान ने चेतावनी दी है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में यातायात को पूरी तरह नियंत्रित करेगा।
अमेरिका (CENTCOM) का रुख: राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर हुए थे हमले
दूसरी ओर, अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने इस ताजा तनाव की वजह ईरान द्वारा युद्धविराम का पालन न करना और वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार किए जा रहे हमलों को बताया है। सेंटकॉम ने पुष्टि की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देश पर 27 जून को ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर अतिरिक्त हमले किए गए थे।
सेंटकॉम के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान द्वारा पनामा के ध्वज वाले तेल टैंकर ‘एम/टी किकू’ (M/T Kiku) पर किए गए एकतरफा ड्रोन हमले के जवाब में की गई थी, जिसमें 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल लदा हुआ था। इससे ठीक एक दिन पहले ईरान ने सिंगापुर के मालवाहक जहाज ‘एम/वी एवर लवली’ पर भी हमला किया था। अमेरिकी विमानों ने जवाबी कार्रवाई में ईरानी सैन्य निगरानी अवसंरचना, संचार प्रणालियों, वायु रक्षा स्थलों और ड्रोन भंडारण सुविधाओं को निशाना बनाया।
कुवैत और बहरीन में सायरन की गूंज, एयर डिफेंस एक्टिव
ईरान के इस बड़े हमले के दावे के बाद प्रभावित देशों में अफरा-तफरी का माहौल है:
- कुवैत का एक्शन: कुवैत सेना के जनरल स्टाफ मुख्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि उनकी वायु रक्षा प्रणालियाँ (Air Defense Systems) सक्रिय हैं और “शत्रुतापूर्ण मिसाइल और ड्रोन हमलों” को हवा में ही इंटरसेप्ट कर रही हैं। नागरिकों को धमाकों की आवाज से न घबराने की सलाह दी गई है।
- बहरीन में रेड अलर्ट: बहरीन के आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने भी X पर घोषणा की कि देश में आपातकालीन चेतावनी सायरन बजा दिए गए हैं। नागरिकों और प्रवासियों से तुरंत निकटतम सुरक्षित स्थानों और शेल्टरों में जाने की अपील की गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक व्यापार मार्ग पर लगातार हो रहे हमलों और दोनों महाशक्तियों के बीच सीधे मिसाइल युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को बड़े खतरे में डाल दिया है। यदि दोनों पक्षों की ओर से हमलों का यह सिलसिला तुरंत नहीं थमा, तो यह संकट एक पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसकी चपेट में कई अन्य देश भी आ सकते हैं।
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