- पांच साल से अधिक समय से अनुपस्थित 128 डॉक्टरों पर कार्रवाई होगी
- स्वास्थ्य विभाग को विभागीय कार्यवाही शुरू करने के निर्देश
- सरकार का फोकस स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही बढ़ाने पर
भुवनेश्वर; ओडिशा में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी (Mohan Charan Majhi) ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने पांच वर्षों से अधिक समय से ड्यूटी से अनुपस्थित 128 मेडिकल ऑफिसरों (Odisha Doctors Absent from Duty) और डेंटल सर्जनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया है।
सरकार का मानना है कि लंबे समय तक डॉक्टरों की अनुपस्थिति से सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं और इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ता है।
Odisha Doctors Absent from Duty: सरकार ने क्यों उठाया कदम?
स्वास्थ्य विभाग ने पहले कई बार समाचार पत्रों के माध्यम से सार्वजनिक नोटिस जारी कर संबंधित डॉक्टरों से ड्यूटी पर लौटने और अनुपस्थिति का कारण बताने को कहा था।
हालांकि, कई डॉक्टरों ने न तो जवाब दिया और न ही सेवा में वापस लौटे। इसके बाद सरकार ने विभागीय कार्रवाई शुरू करने का फैसला लिया।
अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहना सरकारी सेवा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।
वर्षों तक ड्यूटी से दूर रहीं डॉक्टर
अधिकारियों ने बताया कि एक पूर्व मेडिकल ऑफिसर, डॉ. बिचक्षणा पाणिग्राही, वर्ष 2012 से बिना अनुमति अनुपस्थित थीं। कई बार कारण बताओ नोटिस जारी होने के बावजूद उन्होंने न तो जवाब दिया और न ही ड्यूटी जॉइन की।
इसके बाद उन्हें सरकारी सेवा से हटा दिया गया। यह मामला सरकार के लिए अन्य लंबित मामलों पर कार्रवाई का आधार भी बना।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?
राज्य सरकार पिछले कुछ वर्षों में नए अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर बड़ा निवेश कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉक्टरों की जवाबदेही सुनिश्चित होने से सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। साथ ही यह संदेश भी जाएगा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में नियुक्त कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियों का पालन करना होगा।
मुख्यमंत्री माझी ने स्पष्ट किया है कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश जारी रखेगी, लेकिन मरीजों को डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
सरकार का बड़ा संदेश
इस कार्रवाई को केवल अनुशासनात्मक कदम नहीं बल्कि स्वास्थ्य प्रशासन में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
सरकार को उम्मीद है कि इससे सरकारी अस्पतालों में कार्य संस्कृति मजबूत होगी और आम लोगों को समय पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
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