मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृत्युदंड के फैसले को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
- हाईकोर्ट में अपील: मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने मेरठ जिला अदालत के फैसले को चुनौती दी है।
- फांसी की सजा: दोनों को 14 अक्टूबर 2026 को सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृत्युदंड सुनाया गया था।
- आगे की प्रक्रिया: दोषसिद्धि और सजा पर अंतिम कानूनी स्थिति इलाहाबाद हाईकोर्ट की सुनवाई और आवश्यक पुष्टि प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।
मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित ब्लू ड्रम हत्याकांड में नया कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मृत्युदंड की सजा पाए मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर जिला अदालत के फैसले को चुनौती दी है।
मेरठ की अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोनों को हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई। अब अपील के जरिए उन्होंने दोषसिद्धि और सजा, दोनों को रद्द करने की मांग की है।
यह मामला मार्च 2025 में सामने आया था, जब सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उनके शव को नीले प्लास्टिक के ड्रम में छिपाए जाने का खुलासा हुआ। घटना ने पूरे देश में व्यापक चर्चा पैदा की थी।
मुस्कान-साहिल की अपील में क्या कहा गया?
मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की ओर से दाखिल अपील में निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई है। बचाव पक्ष ने मामले में प्रस्तुत परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और अभियोजन के दावों पर सवाल उठाए हैं।
अपील में कथित तौर पर यह तर्क दिया गया है कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। बचाव पक्ष ने साक्ष्यों की व्याख्या और गवाहों के बयानों को लेकर भी आपत्तियां उठाई हैं।
हालांकि, ये अपीलकर्ताओं के कानूनी तर्क हैं। इन पर अंतिम निर्णय हाईकोर्ट करेगा। अपील दाखिल होने का अर्थ यह नहीं है कि निचली अदालत का फैसला रद्द हो गया है या दोनों को आरोपों से मुक्त कर दिया गया है।
मेरठ कोर्ट ने 14 अक्टूबर को सुनाई थी फांसी की सजा
मेरठ की जिला अदालत ने इस मामले की सुनवाई के बाद दोनों को हत्या और सबूत मिटाने से जुड़े अपराधों में दोषी ठहराया था।
30 सितंबर 2026 को दोषसिद्धि का फैसला आया, जबकि 14 अक्टूबर को सजा सुनाई गई। अदालत ने मामले को विरल से विरलतम श्रेणी का मानते हुए मृत्युदंड दिया था।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाह पेश किए थे। मुकदमे की कार्यवाही एक साल से अधिक समय तक चली।
मृत्युदंड के मामलों में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा पर हाईकोर्ट की पुष्टि की कानूनी प्रक्रिया भी आवश्यक होती है। इसलिए अपील के साथ-साथ सजा की पुष्टि से जुड़ी कार्यवाही भी महत्वपूर्ण है।
क्या है मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड?
यह मामला मार्च 2025 में मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र से सामने आया था। सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उनके शव के टुकड़ों को नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में रखकर सीमेंट से छिपाने का मामला सामने आया था।
पुलिस जांच के बाद सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया गया था। जांच और मुकदमे की सुनवाई के बाद जिला अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया।
मामले में शव को ड्रम में छिपाने का तरीका सामने आने के बाद इसे मीडिया में ‘ब्लू ड्रम केस’ या ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ के नाम से जाना जाने लगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल होने के बाद अदालत संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत मामले पर विचार करेगी। इसमें निचली अदालत के फैसले, प्रस्तुत साक्ष्यों और बचाव पक्ष की दलीलों की समीक्षा शामिल हो सकती है।
मृत्युदंड के मामलों में हाईकोर्ट की पुष्टि एक महत्वपूर्ण कानूनी चरण है। जब तक आवश्यक न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक सजा पर अमल नहीं किया जा सकता।
फिलहाल, अपील दाखिल होने से निचली अदालत का फैसला अपने आप समाप्त नहीं होता। मामले की अगली सुनवाई की तारीख और हाईकोर्ट का निर्णय सामने आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
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