चक्रवात अर्नब के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में बारिश की चेतावनी, किसानों को फसल सुरक्षित रखने की सलाह।
- 29 अक्टूबर को बस्तर, बलरामपुर-रामानुजगंज, सूरजपुर, कोरिया और कोरबा में भारी से अति भारी बारिश की आशंका है।
- पकी धान, मक्का और तिलहन की फसल काटकर सुरक्षित रखें तथा खेतों में जलनिकासी सुनिश्चित करें।
- गेहूं, चना और मसूर की बुवाई मौसम साफ होने तक टालने और नवंबर के पहले सप्ताह से परिस्थितियों के अनुसार शुरू करने की सलाह दी गई है।
रायपुर: छत्तीसगढ़ में चक्रवात अर्नब के प्रभाव से मौसम में बदलाव आया है। मौसम विभाग ने गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को राज्य के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश, गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की आशंका जताई है। इसके मद्देनजर किसानों को खरीफ फसलों की सुरक्षा और कृषि कार्यों की योजना मौसम के अनुसार बनाने की सलाह दी गई है।
चक्रवात अर्नब बुधवार सुबह आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र को पार कर चुका है। इसके प्रभाव से छत्तीसगढ़ में 29 अक्टूबर से 1 नवंबर तक अलग-अलग स्थानों पर हल्की से लेकर अति भारी बारिश हो सकती है।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों के लिए विशेष सलाह जारी की है। इसमें पकी फसलों की कटाई, अनाज के सुरक्षित भंडारण, खेतों में जलनिकासी और रबी फसलों की बुवाई को लेकर सावधानियां शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ के इन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार, 29 अक्टूबर को बस्तर, बलरामपुर-रामानुजगंज, सूरजपुर, कोरिया और कोरबा जिलों में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
30 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका बनी हुई है।
बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने और खेतों में जलभराव की समस्या हो सकती है। लोगों को स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की सलाह दी जाती है।
किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी, पकी फसल जल्द काटने की सलाह
चक्रवात के प्रभाव से होने वाली बारिश खरीफ फसलों की कटाई और भंडारण को प्रभावित कर सकती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को धान, मक्का और तिलहन की जो फसलें पक चुकी हैं, उनकी जल्द कटाई करने की सलाह दी है।
किसानों को इन सावधानियों पर ध्यान देना चाहिए:
- पकी हुई फसल की कटाई जल्द पूरी करें।
- कटी हुई उपज को बारिश से बचाकर सुरक्षित और ढके हुए स्थान पर रखें।
- खेतों में जलभराव रोकने के लिए उचित जलनिकासी की व्यवस्था करें।
- अनाज को सुखाकर साफ, हवादार और सुरक्षित जगह पर भंडारित करें।
- बारिश के दौरान फसलों में कीटनाशक और खरपतवारनाशक का छिड़काव न करें।
बीजों को भंडारित करते समय उनकी अंकुरण क्षमता और कीटों से सुरक्षा का भी ध्यान रखना जरूरी है।
गेहूं, चना और मसूर की बुवाई फिलहाल टालने की सलाह
लगातार बारिश की आशंका को देखते हुए कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों को गेहूं, चना और मसूर जैसी रबी फसलों की बुवाई फिलहाल स्थगित रखने की सलाह दी है।
मौसम साफ होने के बाद नवंबर के पहले सप्ताह से बुवाई शुरू करने की सलाह दी गई है। खेतों में अत्यधिक नमी या पानी जमा होने पर बुवाई करने से फसल की स्थापना प्रभावित हो सकती है।
किसानों को अपने क्षेत्र की मौसम स्थिति, खेतों की नमी और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार आगे का निर्णय लेना चाहिए।
सब्जियों, बागवानी और केले की फसल को कैसे बचाएं?
तेज हवाओं और बारिश से सब्जियों तथा बागवानी फसलों को भी नुकसान पहुंच सकता है। जिन सब्जियों और फलों की उपज तैयार है, उनकी जल्द तुड़ाई कर सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है।
करेला, लौकी और अन्य बेल वाली फसलों को सहारा देकर मजबूत करना चाहिए। केले के उन पौधों को भी बांस या अन्य उपयुक्त सहारे से मजबूती देने की सलाह दी गई है, जिन पर फल या फूल लगे हैं।
बारिश के बाद फसलों में रोग और कीटों की निगरानी करना भी जरूरी है। किसी समस्या के संकेत मिलने पर कृषि विशेषज्ञ से उचित सलाह लेनी चाहिए।
पशुपालक भी बरतें सावधानी
खराब मौसम के दौरान पशुओं की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है। कृषि विशेषज्ञों ने पशुपालकों को पशुओं को सुरक्षित और सूखे स्थानों पर रखने तथा पर्याप्त चारा और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की सलाह दी है।
बिजली गिरने या तेज हवाएं चलने के दौरान पशुओं को पेड़ों के नीचे नहीं बांधना चाहिए। यदि किसी पशु में सुस्ती, भूख कम लगना, दस्त या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
1 नवंबर तक मौसम पर रखें नजर
चक्रवात अर्नब के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में 1 नवंबर तक अलग-अलग स्थानों पर बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में किसानों और आम नागरिकों को मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान तथा जिला प्रशासन के निर्देशों पर ध्यान देना चाहिए।
बारिश और तेज हवाओं के दौरान खुले खेतों में काम करने, बिजली चमकने पर खुले स्थानों में रहने और जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचना चाहिए। किसान मौसम के अनुसार कटाई, भंडारण और बुवाई की योजना बनाकर संभावित नुकसान को कम कर सकते हैं।
