दिल्ली में विरोध मार्च के दौरान सामने आए वीडियो को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
- विवाद की शुरुआत: 12 अक्टूबर को दिल्ली में विरोध मार्च के दौरान राहुल गांधी और डीके शिवकुमार से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
- संपत्ति का विवरण: 2023 के चुनावी हलफनामे में शिवकुमार ने लगभग ₹1,413.80 करोड़ की संपत्ति घोषित की थी।
- दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे: BJP ने इसे मुख्यमंत्री और कन्नड़ लोगों के अपमान से जोड़ा, जबकि शिवकुमार ने कहा कि राहुल गांधी उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित थे।
बेंगलुरु|18 अक्टूबर : कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच दिल्ली में हुए एक घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) आमने-सामने हैं। 12 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध मार्च के दौरान सामने आए एक वीडियो में राहुल गांधी कथित तौर पर शिवकुमार को पीछे करते दिखाई देते हैं। BJP ने इस वीडियो के आधार पर राहुल गांधी पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री का अपमान करने का आरोप लगाया है। वहीं, शिवकुमार ने दावा किया है कि राहुल गांधी ने उन्हें धक्का नहीं दिया, बल्कि भीड़ के बीच उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।
इस विवाद ने कर्नाटक की राजनीति में नया बयानबाजी का दौर शुरू कर दिया है। BJP नेताओं ने इसे कन्नड़ लोगों के सम्मान से जोड़कर सवाल उठाए हैं, जबकि शिवकुमार ने विपक्ष पर घटना को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है।
डीके शिवकुमार ने क्या कहा?
डीके शिवकुमार ने राहुल गांधी के साथ अपने संबंधों का बचाव करते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व के समर्थन और आशीर्वाद से उन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान भारी भीड़ थी और राहुल गांधी ने उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पीछे आ रहे वाहन में बैठने की सलाह दी थी।
शिवकुमार के मुताबिक, वीडियो के आधार पर लगाए जा रहे आरोप घटना की पूरी परिस्थितियों को नहीं दर्शाते। उन्होंने BJP पर इस घटनाक्रम को राजनीतिक विवाद बनाने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया।
हालांकि, वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम की व्याख्या को लेकर दोनों राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
BJP ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
BJP नेताओं ने वीडियो को साझा करते हुए राहुल गांधी के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि विरोध मार्च के दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री को पीछे करके राहुल गांधी ने उनके पद और राज्य के लोगों के सम्मान की अनदेखी की।
कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के मुख्य सचेतक और BJP नेता एन. रवि कुमार ने आरोप लगाया कि इस घटना से करीब 7.4 करोड़ कन्नड़ लोगों का अपमान हुआ है।
BJP सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी इस घटनाक्रम पर आपत्ति जताई। पार्टी के नेताओं ने सवाल उठाया कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के सामने राज्य के मुख्यमंत्री के साथ ऐसा व्यवहार क्यों हुआ।
ये BJP नेताओं के राजनीतिक आरोप हैं। शिवकुमार ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और राहुल गांधी के व्यवहार को अपमानजनक बताए जाने का खंडन किया है।
12 अक्टूबर को दिल्ली में क्या हुआ था?
12 अक्टूबर को राहुल गांधी ने विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली में विरोध मार्च में हिस्सा लिया था। प्रदर्शन का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराना था।
मार्च के दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे। इसी बीच राहुल गांधी और शिवकुमार से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगा।
वीडियो को लेकर BJP ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने शिवकुमार को अपने पास से पीछे कर दिया। इसके बाद कांग्रेस नेता की भूमिका और मुख्यमंत्री के साथ उनके व्यवहार को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई।
शिवकुमार ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि भीड़ अधिक होने के कारण राहुल गांधी ने उन्हें पीछे आने वाले वाहन में बैठने के लिए कहा था। उनके अनुसार, यह सुरक्षा को लेकर चिंता का मामला था, न कि उनका अपमान करने का प्रयास।
जी. परमेश्वर ने भी दी प्रतिक्रिया
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन और बड़ी जनसभाओं के दौरान सुरक्षा व्यवस्था संभालना चुनौतीपूर्ण होता है।
परमेश्वर ने अपने अनुभवों का हवाला देते हुए बताया कि बड़े आयोजनों में भीड़ के कारण ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे अवसरों पर सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
उनकी प्रतिक्रिया कांग्रेस की ओर से दिए जा रहे उस स्पष्टीकरण के अनुरूप है, जिसमें घटना को भीड़ और सुरक्षा से जुड़ी परिस्थिति बताया गया है।
कौन हैं डीके शिवकुमार?
डीके शिवकुमार कर्नाटक कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। वह कनकपुरा विधानसभा क्षेत्र का लंबे समय से प्रतिनिधित्व करते रहे हैं और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में भी काम कर चुके हैं।
उन्होंने 3 जून 2026 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इससे पहले वह राज्य में उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके थे।
कांग्रेस में शिवकुमार को एक प्रभावशाली संगठनकर्ता और चुनावी रणनीतिकार माना जाता है। कर्नाटक में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज और विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों में उनकी भूमिका के कारण उन्हें पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिना जाता है।
राहुल गांधी के साथ उनके राजनीतिक संबंधों को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है। मौजूदा विवाद में शिवकुमार ने स्वयं राहुल गांधी के समर्थन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व और पार्टी के आशीर्वाद से ही वह मुख्यमंत्री बने हैं।
2023 के चुनावी हलफनामे में कितनी संपत्ति घोषित की थी?
डीके शिवकुमार की संपत्ति भी उनकी राजनीतिक पहचान के साथ चर्चा का विषय रही है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और उसके चुनावी हलफनामों के विश्लेषण के अनुसार, उन्होंने 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान लगभग ₹1,413.80 करोड़ की कुल संपत्ति घोषित की थी।
हलफनामे के अनुसार, उनकी घोषित संपत्ति का विवरण इस प्रकार था:
- अचल संपत्ति: लगभग ₹1,140.38 करोड़
- चल संपत्ति: लगभग ₹273.42 करोड़
- कुल घोषित संपत्ति: लगभग ₹1,413.80 करोड़
- कुल देनदारियां: लगभग ₹265.07 करोड़
ये आंकड़े 2023 के चुनावी हलफनामे से संबंधित हैं। इन्हें उनकी वर्तमान संपत्ति का अद्यतन आकलन नहीं माना जाना चाहिए। संपत्ति के मूल्यांकन और देनदारियों में समय के साथ बदलाव संभव है।
ADR के विश्लेषण में घोषित संपत्ति के आधार पर शिवकुमार को 2023 में देश के सबसे अधिक संपत्ति घोषित करने वाले विधायकों में शीर्ष स्थान पर रखा गया था।
वायरल वीडियो से शुरू हुई बहस का आगे क्या होगा?
फिलहाल विवाद का केंद्र वीडियो की व्याख्या और उससे जुड़े राजनीतिक आरोप हैं। BJP इस घटनाक्रम को मुख्यमंत्री के पद और कन्नड़ लोगों के सम्मान से जोड़ रही है, जबकि शिवकुमार ने इसे सुरक्षा से जुड़ी परिस्थिति बताते हुए राहुल गांधी का समर्थन किया है।
यह मामला कांग्रेस और BJP के बीच राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बन गया है। हालांकि, केवल वायरल वीडियो के आधार पर किसी के इरादे या घटना के पूरे संदर्भ के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
दोनों पक्षों के बयानों के बीच यह विवाद कर्नाटक की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
ये भी पढ़े: औरैया: 75 वर्षीय रामसुगर और 30 साल की रानी राजपूत की कथित प्रेम कहानी वायरल, शादी की चर्चा तेज
